ये भी सही वो भी सही...

हमारे चारो और प्रथ्वी , आकाश, सुर्य, चंद्र,जीवन दायिनी हवा ,जल, पेड-पौधे एवं विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी धरती को हरा भरा रत्न जड़ित सजाये हैं !
और हम इन सब को छोड़ कर और ही किसी दिशा में बहुत ही तीव्र गती से आगे बढ़ते चले जा रहे हैं ....
 किसी को कोई भी खबर नही है की हम क्या कर रहे हैं बस भागे जा रहे हैं ,भागे जा रहे हैं और भागे ही जा रहे हैं इसलिए...
जिंदगी की राहों में जो भी मिला
     ये भी सही वो भी सही .
अभिषेक पाराशर (अभी) 
Good morning 

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